Akbar Birbal Hindi Kahani | अकबर बीरबल की कहानी

एकबार बादशाह अकबर ने बीरबल को आदेश दिया की वह चार मूर्खों को ढूंढ कर एक सप्ताह के अंदर दरबार में हाजिर करें । और वो चारों एक से बढ़कर एक होने चाहिए। 

आदेश मिलते ही बीरबल ‘ चार मूर्ख खोजो अभियान’ पर निकल पड़े। उन्हें एक आदमी मिला जो नाव में बैठकर एक छेद बना रहा था । बीरबल ने उसे पूछा भाई ये क्या कर रह हो । तो उसने बोला की बारिश का पानी नाव में घुस गया है , उसे निकालने के लिए नाव में छेद बना रहा हूँ । बीरबल को पहला मूर्ख मिल गया था , तो बीरबल ने उस आदमी को अपने साथ चलने के लिए बोला ।

आगे बढ़ने पर बीरबल को और एक आदमी दिखा जो खुद घोड़ी पर बैठा था और घास का ढेर अपने सिर पर रखा हुआ था । जब बीरबल ने इसका कारण पूछा तो वह बोला, ” मेरी घोड़ी बहुत नाजुक हे । सारा भार घोड़ी पर न पड़े इसीलिए खुद तो घोड़ी पर बैठा हूँ पर घास अपने सिर पर रख लिया हे । बीरबल को वह आदमी मूर्ख लगा और उसे भी अपने साथ ले लिया ।

Enjoy akbar-birbal stories | akbar-birbal |

अगले दिन सुबह बीरबल दोनों मूर्खों को लेकर दरबार में उपस्थित हो गया और अकबर से कहा , ” जहाँपनाह आपकी आदेश अनुसार मैने चार मूर्खों को एकत्रित कर लिया हे ।”

” किन्तु ये तो दो ही हैं । मैने तो चार लाने को कहा था ” अकबर ने कहा ।

” नहीं जहांपनाह , दरबार में चार मूर्ख उपस्थित हैं । ” बीरबल ने कहा ।

अकबर ने हैरानी से पूछा मुझे तो दो ही दिखाई दे रहे हैं ।

तो बीरबल ने बोलै , ” हुज़ूर दो मूर्ख टी ये रहे , तीसरे आप जो मूर्खों को एकत्रित करने के लिए कह रहे हैं , और चौथा मैं हूँ जो मूर्खों को एकत्रित कर रहा हूँ ।

बीरबल का जवाब सुनकर अकबर जोर जोर से हसने लगे।

Categories: Akbar Birbal

0 Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *