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नरमुंड वाली चुड़ैल

नरमुंड वाली चुड़ैल की यह कहानी राजकोट के एक साधारण इंसान की जिंदगी की सबसे खौफनाक रात की दास्तान है। यह कहानी सिर्फ डर पैदा नहीं करती, बल्कि यह एहसास भी दिलाती है कि कभी-कभी जिंदगी में कुछ ऐसी घटनाएँ घट जाती हैं जिनका कोई तर्क नहीं होता।

नरमुंड वाली चुड़ैल – राजकोट की सबसे डरावनी रात

गुजरात के राजकोट शहर में रहने वाले जितेन्द्र परमार एक मेहनती और ईमानदार इंसान थे। वे एक ATM सर्विस कंपनी में काम करते थे। उनका काम शहर के अलग-अलग इलाकों में खराब ATM मशीनों को ठीक करना था। शादीशुदा जिंदगी अच्छी चल रही थी। पत्नी और चार साल का बेटा उनकी छोटी-सी दुनिया थे।

जितेन्द्र ज्यादा धार्मिक नहीं थे, लेकिन भगवान में विश्वास जरूर रखते थे। मंदिर दिख जाए तो सिर झुका लेते और मस्जिद के सामने से गुजरें तो आदर से हाथ जोड़ लेते।

उनकी नौकरी आसान नहीं थी। दिन हो या रात, जब भी किसी ATM मशीन में खराबी आती, उन्हें तुरंत मौके पर पहुँचना पड़ता। कई बार आधी रात को भी उन्हें सुनसान इलाकों में जाना पड़ता था।

एक बरसाती रात करीब साढ़े ग्यारह बजे कंपनी से उन्हें कॉल आया। शहर से लगभग 25 किलोमीटर दूर एक नए रिहायशी इलाके में ATM मशीन अचानक बंद हो गई थी। अगले दिन बैंक का बड़ा ऑडिट था, इसलिए मशीन तुरंत ठीक करना जरूरी था।

आमतौर पर दो इंजीनियर साथ जाते थे, लेकिन उस रात उनका पार्टनर तेज बुखार की वजह से छुट्टी पर था। मजबूरी में जितेन्द्र को अकेले जाना पड़ा।

बारिश रुक चुकी थी, लेकिन सड़कें अब भी गीली थीं। हवा में अजीब-सी ठंडक थी। बाइक चलाते हुए जितेन्द्र को बार-बार ऐसा महसूस हो रहा था जैसे कोई उनका पीछा कर रहा हो।

करीब एक घंटे बाद वे उस इलाके में पहुँचे। वहाँ चारों तरफ अधूरी इमारतें थीं। सड़कें लगभग सुनसान थीं। दूर-दूर तक सिर्फ स्ट्रीट लाइट की पीली रोशनी दिखाई दे रही थी।

ATM बूथ के बाहर एक बूढ़ा सिक्योरिटी गार्ड बैठा था। उसके पास ही सफेद कपड़ों में एक लड़की खड़ी थी। लड़की के लंबे खुले बाल उसके चेहरे को आधा ढक रहे थे।

जितेन्द्र ने सोचा कि शायद उसे पैसे निकालने होंगे।

उन्होंने बाइक पार्क की और मशीन चेक करने अंदर चले गए। तभी वह लड़की भी बूथ की ओर बढ़ने लगी, लेकिन सिक्योरिटी गार्ड ने उसे रोक दिया।

“मैडम, मशीन खराब है… थोड़ा इंतजार कीजिए,” गार्ड ने कहा।

लड़की चुपचाप बाहर खड़ी रही।

ATM मशीन खोलकर जितेन्द्र अपना काम करने लगे। बूथ के अंदर अजीब-सी घुटन महसूस हो रही थी। अचानक मशीन की स्क्रीन अपने-आप ब्लिंक करने लगी। बिजली हल्की-हल्की झपक रही थी।

तभी जितेन्द्र की नजर शीशे के दरवाजे से बाहर गई…

और अगले ही पल उनका खून जम गया।

वह लड़की अपने हाथ में सिक्योरिटी गार्ड का कटा हुआ सिर पकड़े खड़ी थी।

गार्ड का शरीर जमीन पर पड़ा था और उसकी आँखें खुली हुई थीं।

लड़की की आँखें पूरी तरह सफेद थीं। उसके होंठों पर डरावनी मुस्कान थी।

जितेन्द्र का पूरा शरीर कांप उठा। उन्होंने तुरंत नजरें फेर लीं।

“नहीं… ये मेरा भ्रम है…” उन्होंने खुद को समझाया।

उनका गला सूख चुका था। तभी अचानक फोन बज उठा।

स्क्रीन पर उनके सीनियर का नाम चमक रहा था।

“जितेन्द्र, काम जल्दी खत्म करो… बैंक वाले बहुत दबाव डाल रहे हैं,” उधर से आवाज आई।

कांपते हाथों से उन्होंने मशीन ठीक करनी शुरू कर दी। करीब दस मिनट बाद ATM दोबारा चालू हो गया।

हिम्मत जुटाकर उन्होंने बाहर देखा…

सब कुछ सामान्य था।

गार्ड अपनी कुर्सी पर बैठा था और वह लड़की पास में खड़ी थी जैसे कुछ हुआ ही न हो।

जितेन्द्र ने राहत की सांस ली।

“शायद थकान की वजह से भ्रम हुआ होगा,” उन्होंने सोचा।

वे जल्दी से अपना सामान समेटकर बाहर निकले और बाइक की तरफ बढ़े। लेकिन जाने से पहले उन्होंने एक बार फिर पीछे मुड़कर देखा…

और इस बार उनकी चीख निकल गई।

लड़की फिर से हाथ में नरमुंड लिए खड़ी थी।

इस बार उसका चेहरा पूरी तरह दिखाई दे रहा था। उसकी आँखें लाल थीं और होंठों से खून टपक रहा था।

जितेन्द्र बिना कुछ सोचे बाइक स्टार्ट करके वहाँ से भाग निकले।

सड़क पर तेज हवा चल रही थी। उन्हें बार-बार महसूस हो रहा था कि कोई उनकी बाइक के साथ-साथ दौड़ रहा है।

उन्होंने डर के मारे पीछे देखने की हिम्मत नहीं की।

अचानक उनकी बाइक बंद हो गई।

उन्होंने कई बार किक मारी, लेकिन बाइक स्टार्ट नहीं हुई।

धीरे-धीरे उन्होंने नजर उठाई…

सामने एक विशाल बरगद का पेड़ था।

पेड़ की मोटी शाखा से कोई आकृति उल्टी लटक रही थी।

वह धीरे-धीरे झूल रही थी।

कुछ सेकंड बाद वह आकृति नीचे उतरी।

जितेन्द्र की सांस रुक गई।

वह वही लड़की थी…

लेकिन अब उसके पैर उल्टे थे।

उसके हाथ में फिर वही नरमुंड था।

वह अजीब घरघराती आवाज में कुछ बोल रही थी जिसे समझ पाना असंभव था।

जितेन्द्र का शरीर सुन्न पड़ गया। वे न चीख पा रहे थे, न भाग पा रहे थे।< p class="wp-block-paragraph">चुड़ैल धीरे-धीरे उनके पास आई।

उसके चेहरे से सड़ी हुई बदबू आ रही थी।

वह उनके बिल्कुल पास बैठ गई और उनके सिर पर हाथ फेरने लगी।

जितेन्द्र ने आंखें बंद कर लीं और भगवान का नाम लेने लगे।

इसके बाद उन्हें कुछ याद नहीं…

सुबह जब उनकी आंख खुली तो वे अस्पताल में थे।

कुछ ग्रामीणों ने उन्हें सड़क किनारे बेहोश पड़ा पाया था। उनकी बाइक बरगद के पेड़ के नीचे गिरी हुई थी।

डॉक्टरों के अनुसार वे गहरे सदमे में थे। कई दिनों तक वे ठीक से बोल भी नहीं पाए।

जब भी रात होती, वे डर के मारे कांपने लगते। उन्हें बार-बार वही लाल आंखें और नरमुंड दिखाई देता।

परिवार वालों ने कई मंदिरों में पूजा करवाई। महीनों बाद जाकर उनकी हालत सामान्य हुई।

उस घटना के बाद जितेन्द्र ने नौकरी छोड़ दी और हमेशा के लिए राजकोट से दूर चले गए।

लेकिन आज भी जब बरसात की ठंडी रातों में हवा तेज चलती है, तो उस इलाके के लोग कहते हैं कि बरगद के पेड़ के पास एक सफेद कपड़ों वाली लड़की दिखाई देती है…

जिसके हाथ में एक नरमुंड होता है।


कहानी से सीख

  • रात में सुनसान जगहों पर सावधानी बरतनी चाहिए।
  • डर और भ्रम के बीच इंसान की मानसिक स्थिति कमजोर पड़ सकती है।
  • हर रहस्य का जवाब विज्ञान के पास नहीं होता।

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FAQ

1. नरमुंड वाली चुड़ैल की कहानी क्या है?

यह एक डरावनी हिंदी कहानी है जिसमें एक ATM इंजीनियर को रात के समय एक रहस्यमयी चुड़ैल दिखाई देती है।

2. क्या यह कहानी सच्ची घटना पर आधारित है?

यह कहानी मनोरंजन और हॉरर अनुभव के लिए लिखी गई है। इसे काल्पनिक रूप में प्रस्तुत किया गया है।

3. कहानी में चुड़ैल कैसी दिखाई गई है?

चुड़ैल सफेद कपड़ों में, खुले बालों वाली और हाथ में नरमुंड पकड़े दिखाई गई है। उसके पैर उल्टे होते हैं।

4. इस कहानी का सबसे डरावना हिस्सा कौन सा है?

बरगद के पेड़ के नीचे चुड़ैल का प्रकट होना और उसका जितेन्द्र के पास आना कहानी का सबसे भयावह दृश्य है।

5. क्या यह कहानी बच्चों के लिए उपयुक्त है?

यह हॉरर कहानी है, इसलिए छोटे बच्चों के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती।

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