जलझूलनी/पद्मा एकादशी की पौराणिक व्रत कथा
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को जलझूलनी एकादशी या पद्मा एकादशी कहा जाता है। यह व्रत भगवान श्रीविष्णु को समर्पित है। इस दिन श्रद्धालु भगवान को जल में झूलाते हैं और पद्मा (कमल) पुष्प अर्पित करते हैं। मान्यता है कि इस व्रत को करने से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और भक्त को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
पौराणिक कथा
पौराणिक ग्रंथों में वर्णन आता है कि एक समय राजा महिजीत नामक शासक थे। वे न्यायप्रिय और धर्मनिष्ठ थे, परंतु संतानहीन होने के कारण सदैव दुखी रहते थे।
उन्होंने अपने गुरु वसिष्ठ मुनि से समाधान पूछा। वसिष्ठ मुनि ने तपस्या कर दिव्य दृष्टि से देखा और कहा:
“राजन, पिछले जन्म में आपने एक प्यासे ब्राह्मण को जल न देकर पाप किया था। उसी पाप के कारण इस जन्म में संतान सुख से वंचित हो।”
राजा ने folded hands कहा—
“गुरुदेव, इसका प्रायश्चित क्या है?”
वसिष्ठ मुनि बोले—
“भाद्रपद शुक्ल एकादशी का व्रत करो, जिसे पद्मा एकादशी कहा जाता है। इस व्रत के प्रभाव से तुम्हारे पाप नष्ट होंगे और तुम्हें संतान सुख मिलेगा।”
राजा का व्रत और फल
राजा महिजीत ने अपनी रानी समेत पद्मा एकादशी का व्रत किया। विधिपूर्वक स्नान, पूजा, दान और रात्रि जागरण किया।
व्रत के प्रभाव से उनके पाप नष्ट हो गए। कुछ समय बाद रानी ने एक तेजस्वी पुत्र को जन्म दिया।
इस घटना से पूरे राज्य में हर्ष फैल गया। लोग समझ गए कि एकादशी व्रत केवल पाप निवारण ही नहीं, बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि देने वाला है।
Jal Jhulni/Padma Ekadashi Vrat Katha, जलझूलनी एकादशी कथा, पद्मा एकादशी व्रत कथा, Jal Jhulni Ekadashi Vrat Katha in Hindi, Padma Ekadashi Story, Ekadashi Vrat Katha, विष्णु व्रत कथा, moral stories in hindi
जलझूलनी महोत्सव (डोल ग्यारस)
एक और मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु जल में झूले जाते हैं। इसीलिए इसे जलझूलनी एकादशी भी कहा जाता है।
मंदिरों में भगवान की प्रतिमा को छोटी पालकी या डोली में रखकर जलाशय तक ले जाया जाता है और वहाँ झूला झुलाया जाता है। भक्तजन गाते हैं—
“हरे राम हरे कृष्णा, जय जय विष्णु नारायण।”
भारत के कई हिस्सों में इस एकादशी को जलझूलनी एकादशी कहा जाता है।
- इस दिन मंदिरों में भगवान विष्णु की प्रतिमा को पालकी में बैठाकर जलाशय या नदी तक ले जाया जाता है।
- भक्तजनों द्वारा भक्ति गीत गाए जाते हैं और भगवान को जल में झूला झुलाया जाता है।
- इसे ही “जलझूलनी” परंपरा कहा जाता है।
- राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में इस उत्सव को अत्यधिक धूमधाम से मनाया जाता है।
पद्मा एकादशी की पूजा विधि (Step by Step)
- स्नान व संकल्प – प्रातःकाल पवित्र नदी, सरोवर या घर पर स्नान करें। व्रत का संकल्प लें।
- व्रत नियम – दिनभर उपवास रखें, अन्न और तामसिक भोजन से बचें। केवल फलाहार करें।
- भगवान विष्णु की पूजा – पीले वस्त्र धारण करें, पीले फूल, तुलसी दल और कमल अर्पित करें।
- धूप-दीप व मंत्रजाप – “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
- भजन-कीर्तन और जागरण – रातभर भगवान की आराधना करें।
- दान-पुण्य – अगले दिन प्रातःकाल दान करें, ब्राह्मणों को भोजन कराएँ।
- व्रत पूर्ण – द्वादशी के दिन व्रत का समापन करें।
पद्मा एकादशी का महत्व
- यह व्रत सभी पापों को नष्ट करता है।
- संतान सुख की प्राप्ति होती है।
- भक्त को मोक्ष और विष्णुलोक की प्राप्ति होती है।
- आर्थिक संकट दूर होते हैं और घर में समृद्धि आती है।
- भगवान विष्णु को जल और झूला अर्पित करने से मन की शांति और भक्ति का अनुभव होता है।
- इस व्रत से पिछले जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।
- भक्त को संतान सुख और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
- यह व्रत धन, सुख और समृद्धि प्रदान करता है।
- जल में भगवान को झुलाने से मन शुद्ध होता है और भक्ति गहरी होती है।
कहानी से सीख (Moral of the Story)
- भगवान विष्णु की भक्ति से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं।
- जलझूलनी/पद्मा एकादशी व्रत पापों का नाश और पुण्य की प्राप्ति कराता है।
- भक्ति और आस्था से जीवन में शांति और सुख मिलता है।
👉 और भी धार्मिक व्रत-कथाएँ पढ़ने के लिए देखें: Moral Stories in Hindi

Jal Jhulni/Padma Ekadashi Vrat Katha
The Jal Jhulni Ekadashi, also known as Padma Ekadashi, is observed on the Shukla Paksha Ekadashi of the Bhadrapada month. On this day, devotees worship Lord Vishnu with Padma (lotus) flowers and symbolically swing him in water. It is believed that observing this fast destroys all sins and grants liberation.
🌼 The Mythological Story
Once upon a time, there lived a king named Mahijeet. Though he was just and righteous, he was deeply sorrowful as he had no children.
He approached his guru Vashishtha Muni and asked for a solution. Vashishtha meditated and revealed:
“O King, in your previous birth you denied water to a thirsty Brahmin. Due to that sin, you are deprived of children in this life.”
The king humbly asked—
“Gurudev, how can I atone for my sin?”
Vashishtha replied—
“Observe the fast of Padma Ekadashi. Worship Lord Vishnu with devotion, stay awake the whole night, and offer charity. This will wash away your sins and grant you children.”
The Result of the Fast
The king, along with his queen, observed the Padma Ekadashi Vrat with great devotion. Soon, all his sins were washed away, and by divine grace, they were blessed with a radiant son.
The entire kingdom rejoiced. People realized that the Ekadashi fast not only removes sins but also brings prosperity and happiness.
Jal Jhulni Festival
Another belief states that on this day Lord Vishnu is joyfully swung in water, hence the name Jal Jhulni Ekadashi.
In temples, the idol of Lord Vishnu is taken out in a decorated palanquin to a nearby pond or river and placed on a swing in water amidst devotional songs.
Significance of the Vrat
- Destroys sins of past lives.
- Grants children, prosperity, and salvation.
- Brings peace, wealth, and happiness.
- Strengthens devotion towards Lord Vishnu.
Moral of the Story
- True devotion can change destiny.
- Jal Jhulni/Padma Ekadashi is a path of redemption and prosperity.
- Worshipping Lord Vishnu brings divine blessings and peace.
FAQs: जलझूलनी/पद्मा एकादशी
Q1. जलझूलनी/पद्मा एकादशी कब मनाई जाती है?
👉 भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को।
Q2. इस व्रत में क्या करना चाहिए?
👉 व्रत रखें, स्नान कर भगवान विष्णु को पद्म (कमल) अर्पित करें, रात्रि जागरण और भजन करें।
Q3. जलझूलनी एकादशी क्यों कहते हैं?
👉 इस दिन भगवान विष्णु को जल में झूला झुलाया जाता है।
Q4. इस व्रत से क्या फल मिलता है?
👉 पापों का नाश, संतान सुख, मोक्ष और जीवन में समृद्धि।
Q5. क्या स्त्री-पुरुष दोनों व्रत कर सकते हैं?
👉 जी हाँ, यह व्रत सभी के लिए शुभ माना गया है।
👉 और भी पौराणिक व्रत कथाएँ पढ़ने के लिए देखें: MoralStory.in