Radha Ashtami Vrat Katha In Hindi: राधा अष्टमी पर जरूर पढ़ें
🌺 राधा जी का दिव्य जन्म
भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की भोर थी। बरसाना (वृषभानपुर) में राजा वृषभानु और रानी कीर्ति नदी पर स्नान करने जा रहे थे। तभी आकाश में दिव्य संगीत गूंज उठा, फूलों की वर्षा होने लगी और चारों ओर प्रकाश फैल गया।
रानी कीर्ति ने अचानक देखा—कमल के फूल पर एक अद्भुत बालिका विराजमान है। बालिका के मुखमंडल की आभा इतनी तेजस्वी थी कि सूरज की किरणें भी मंद पड़ गईं।
स्वयं ब्रह्मा और देवताओं ने प्रकट होकर कहा:
“राजा वृषभानु, तुम्हारे भाग्य से यह बालिका जन्मी है। यह कोई साधारण कन्या नहीं, बल्कि स्वयं देवी शक्ति का रूप है। इसका नाम ‘राधा’ होगा और यह कृष्ण की प्राणप्रिया बनेगी।”
राजा-रानी हर्ष से भर उठे। राधा जी के जन्मोत्सव में पूरा बरसाना नाच उठा। गली-गली में मंगल गीत गाए गए।
🌸 राधा जी का बचपन
राधा जी बचपन से ही अद्भुत थीं। उनकी आँखें बंद रहती थीं, मानो वे संसार को नहीं, केवल कृष्ण को देखना चाहती हों। जब श्रीकृष्ण का जन्म हुआ और नंदबाबा ने गोकुल में उत्सव मनाया, तभी पहली बार राधा ने अपनी आँखें खोलीं।
बरसाना और गोकुल की गलियाँ राधा-कृष्ण की हंसी से गूंज उठीं।
कभी राधा और कृष्ण मिलकर गाय चराते, कभी गोपियों संग रास करते। जब कृष्ण माखन चुराते तो राधा मुस्कुराकर कहतीं—
“श्याम, चोरी करने वाले को दंड नहीं, प्रेम मिलता है।”
और कृष्ण हँसकर कहते—
“राधे, यह माखन नहीं, तुम्हारा हृदय है जिसे मैं जीतना चाहता हूँ।”
🌼 राधा-कृष्ण का प्रेम और रासलीला
राधा और कृष्ण का प्रेम सांसारिक नहीं, बल्कि दिव्य था। वृंदावन की गलियों में जब रासलीला होती, तो स्वयं देवता भी उस लीला को देखने आते।
कहा जाता है कि एक बार श्रीकृष्ण ने सैकड़ों गोपियों संग रास रचाया, परंतु हर गोपी को लगा कि कृष्ण केवल उसके साथ हैं।
राधा जी ने मुस्कुराकर कहा—
“श्याम, तुम सबके हो परंतु मेरे बिना अधूरे हो।”
कृष्ण ने उत्तर दिया—
“राधे, तुम मेरी आत्मा हो, और मैं तुम्हारा स्वरूप।”
राधा जी का आध्यात्मिक महत्व
राधा जी को केवल प्रेम की देवी नहीं, बल्कि भक्ति और आस्था का शुद्धतम रूप माना गया है।
भागवत पुराण में कहा गया है कि बिना राधा के कृष्ण केवल ‘कृष’ रह जाते हैं। राधा ही हैं जो कृष्ण को ‘पूर्ण’ बनाती हैं।
🌼 राधा अष्टमी व्रत का महत्व
भक्तों का मानना है कि राधा अष्टमी के दिन व्रत रखने और राधा-कृष्ण की पूजा करने से—
- विवाह योग्य कन्याओं को योग्य वर मिलता है।
- विवाहित स्त्रियों को वैवाहिक सुख और प्रेम की प्राप्ति होती है।
- मनुष्य के जीवन में शांति, आनंद और भक्ति का संचार होता है।
व्रत विधि:
- सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
- राधा-कृष्ण की प्रतिमा को फूल, चंदन, माखन-मिश्री और तुलसी अर्पित करें।
- ‘राधा-कृष्ण’ मंत्र का जाप करें।
- दिनभर उपवास रखें और संध्या आरती में भाग लें।
सुखद निष्कर्ष
राधा जी का जीवन हमें यह सिखाता है कि सच्चा प्रेम आत्मा और परमात्मा का मिलन है।
राधा बिना कृष्ण अधूरे हैं, और कृष्ण बिना राधा अपूर्ण।
इसलिए, राधा अष्टमी का व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रेम और भक्ति का उत्सव है।
सीख (Moral of the Story)
- राधा जी हमें सिखाती हैं कि प्रेम में स्वार्थ नहीं होना चाहिए।
- राधा अष्टमी व्रत रखने से जीवन में भक्ति, शांति और आनंद प्राप्त होता है।
- राधा और कृष्ण का संबंध आत्मा और परमात्मा की एकता का प्रतीक है।

Radha Ashtami Vrat Katha: Must Read on Radha Ashtami
🌺 The Divine Birth of Radha Ji
On the auspicious morning of Bhadrapada Shukla Ashtami, King Vrishbhanu and Queen Kirti witnessed a radiant light near the Yamuna. Within that divine aura, a beautiful girl appeared, glowing brighter than the sun and moon.
The gods proclaimed:
“O King Vrishbhanu, this is no ordinary child. She is the embodiment of divine energy and will become the beloved of Lord Krishna. Name her Radha.”
Thus, Radha’s birth was celebrated with great joy in Barsana.
🌸 Childhood of Radha Ji
Radha’s childhood was filled with wonders. She kept her eyes closed until the birth of Krishna. When Krishna was born in Gokul, Radha finally opened her eyes—as if she wished to see only him first.
Together, Radha and Krishna played in the groves of Vrindavan.
When Krishna stole butter, Radha lovingly said:
“Shyam, why steal when the world already belongs to you?”
Krishna smiled and replied:
“Radhe, it’s not stealing, it’s love.”
🌼 The Divine Love & Rasleela
Radha and Krishna’s love was not worldly—it was eternal and spiritual.
During the Rasleela in Vrindavan, every Gopi felt Krishna was with her alone. Yet Radha knew the truth. She said—
“Shyam, you are everyone’s, but without me, you are incomplete.”
Krishna replied—
“Radhe, you are my soul, and I am your essence.”
Spiritual Significance of Radha Ji
Radha is not only the Goddess of love but also the supreme embodiment of devotion. Scriptures say—without Radha, Krishna is incomplete. She completes him, just as devotion completes God.
🌼 Importance of Radha Ashtami Vrat
Fasting and worshipping on Radha Ashtami grants:
- Harmony in marriage
- Divine love and peace
- Liberation from sorrows
Rituals:
- Take a holy bath and vow to fast.
- Offer flowers, butter, mishri, and tulsi to Radha-Krishna.
- Chant their names throughout the day.
- Break the fast only after evening prayers.
Conclusion
Radha Ji teaches us that true love is spiritual, selfless, and eternal.
Radha and Krishna symbolize the eternal union of soul and Supreme Soul.
Thus, Radha Ashtami is not just a festival—it is the celebration of divine love and devotion.
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FAQs: राधा अष्टमी विशेष प्रश्न
Q1. राधा अष्टमी कब मनाई जाती है?
👉 भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को।
Q2. राधा अष्टमी पर क्या चढ़ाया जाता है?
👉 फूल, चंदन, तुलसी, माखन और मिश्री।
Q3. राधा जी का जन्म कहाँ हुआ था?
👉 बरसाना (वृषभानपुर) में।
Q4. राधा अष्टमी व्रत का क्या फल मिलता है?
👉 वैवाहिक सुख, भक्ति और आत्मिक शांति।
Q5. क्या यह व्रत स्त्रियाँ ही रखती हैं?
👉 नहीं, पुरुष और स्त्रियाँ दोनों ही इस व्रत का पालन कर सकते हैं।
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