राजा, बलि और बालक की बुद्धिमानी एक प्रेरक हिंदी नैतिक कहानी है जिसमें एक निडर और ईश्वर भक्त बालक अपनी सूझबूझ से राजा का हृदय परिवर्तन कर देता है। यह कहानी सिखाती है कि संकट की घड़ी में भी आस्था, साहस और सत्य का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए।
राज्य की चिंता और कठोर निर्णय
बहुत समय पहले एक समृद्ध राज्य में एक शक्तिशाली राजा राज करता था। उसके पास धन, सेना और वैभव सब कुछ था, परंतु संतान नहीं थी। वर्षों तक यज्ञ, पूजा और दान करने के बाद भी उसे पुत्र प्राप्ति नहीं हुई।
सलाहकारों के कहने पर राजा ने तांत्रिकों से सलाह ली। तांत्रिकों ने कहा कि यदि किसी बालक की बलि दी जाए, तो उसे पुत्र रत्न की प्राप्ति होगी। पुत्र मोह में अंधा होकर राजा ने राज्य में घोषणा कर दी कि जो अपना बच्चा बलि के लिए देगा, उसे अपार धन दिया जाएगा।
गरीबी और स्वार्थ का निर्णय
राज्य के एक गरीब परिवार ने धन के लालच में अपने ही एक बालक को राजा को सौंप दिया। वह बालक ईश्वर भक्त था और संतों के सत्संग में समय बिताता था। माता-पिता ने सोचा कि इससे बाकी बच्चों का जीवन सुधर जाएगा।
अंतिम इच्छा और चार रेत की ढेरियां
बलि से पहले बालक से उसकी अंतिम इच्छा पूछी गई। उसने थोड़ी रेत मंगवाई और चार ढेरियां बनाई।
उसने तीन ढेरियां गिरा दीं और चौथी के सामने हाथ जोड़कर बैठ गया।
राजा ने पूछा, “तुमने ऐसा क्यों किया?”
बालक ने उत्तर दिया:
पहली ढेरी माता-पिता की थी, जिन्होंने धन के लिए मुझे बेच दिया।
दूसरी रिश्तेदारों की थी, जिन्होंने मुझे बचाने का प्रयास नहीं किया।
तीसरी आपकी थी, क्योंकि राजा का धर्म प्रजा की रक्षा करना है।
और चौथी मेरे ईश्वर की है—अब मुझे केवल उन्हीं पर विश्वास है।
राजा का हृदय परिवर्तन
बालक की बुद्धिमानी और निर्भीकता देखकर राजा का हृदय बदल गया। उसने तुरंत बलि रुकवा दी और बालक को अपना पुत्र घोषित कर दिया।
राजा को समझ आ गया कि सच्ची शक्ति हिंसा में नहीं, बल्कि न्याय और धर्म में है।
कहानी से शिक्षा
ईश्वर पर विश्वास रखने वाला कभी पराजित नहीं होता।
संकट में धैर्य और बुद्धिमत्ता ही सबसे बड़ा हथियार है।
अधर्म का मार्ग अंततः विनाश की ओर ले जाता है।
English story– Raja, Sacrifice and the Wise Child Story

The King’s Worry and a Cruel Decision
Long ago, there was a powerful king who ruled a prosperous kingdom. He had wealth and glory but no child. After many rituals failed, he consulted tantrics who suggested sacrificing a child for a son.
Blinded by desire, the king announced a reward for anyone willing to give their child for sacrifice.
Poverty and Selfish Choice
A poor family, tempted by money, gave their God-loving son to the king. The boy was devoted to faith and spirituality.
The Four Heaps of Sand
Before the sacrifice, the boy asked for sand. He made four heaps and destroyed three.
He explained:
The first heap was for his parents who sold him.
The second for relatives who stayed silent.
The third for the king who failed his duty.
The fourth was for God—his only true protector.
The King’s Transformation
The boy’s wisdom shook the king. He stopped the sacrifice and adopted the boy as his son.
The king realized that justice and faith are greater than fear and superstition.
Moral of the Story
Faith in God protects the innocent.
Wisdom and courage can change destiny.
Righteousness always wins over cruelty.
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FAQ – Frequently Asked Questions
राजा, बलि और बालक की बुद्धिमानी कहानी क्या सिखाती है?
यह कहानी सिखाती है कि कठिन परिस्थिति में भी ईश्वर पर विश्वास और बुद्धिमत्ता बनाए रखनी चाहिए।
बालक ने चार रेत की ढेरियां क्यों बनाई?
चार ढेरियां जीवन के चार सहारों का प्रतीक थीं—माता-पिता, रिश्तेदार, राजा और ईश्वर।
राजा ने अंत में क्या निर्णय लिया?
राजा ने बलि रोक दी और बालक को अपना पुत्र बना लिया।
What is the moral of Raja and Wise Child story?
The story teaches faith, courage, wisdom, and righteousness.
Hindi Queries with Answers
राजा और बालक की कहानी सुनाओ
यह एक प्रेरक कहानी है जिसमें एक बुद्धिमान बालक अपनी समझदारी से राजा का हृदय परिवर्तन कर देता है।
बालक ने रेत की ढेरियां क्यों तोड़ी?
उसने तीन ढेरियां इसलिए तोड़ीं क्योंकि उसे लगा कि माता-पिता, रिश्तेदार और राजा ने अपना कर्तव्य नहीं निभाया।
इस कहानी की शिक्षा क्या है?
ईश्वर पर अटूट विश्वास और साहस अंत में विजय दिलाता है।
