जब श्री कृष्ण बोले मुझे कहीं छुपा लो | कृष्ण भक्ति प्रेरक कहानी | Krishna Bhakti Story
जब श्री कृष्ण बोले, मुझे कहीं छुपा लो एक प्रसिद्ध कृष्ण भक्ति प्रेरक कहानी है जिसमें बाल श्री कृष्ण और एक साधारण कुम्हार के बीच प्रेम, विश्वास और मोक्ष का अद्भुत संवाद होता है। यह कहानी सिखाती है कि सच्चा प्रेम और निष्काम भक्ति ही चौरासी लाख योनियों के बंधन से मुक्ति दिला सकती है।
यशोदा मैया का क्रोध और बाल लीला
एक बार नटखट बाल श्री कृष्ण अपनी शरारतों से यशोदा मैया को बहुत परेशान कर रहे थे। कभी माखन चुराना, कभी गोपियों को चिढ़ाना—कन्हैया की लीला निराली थी।
उस दिन मैया यशोदा सच में क्रोधित हो गईं और हाथ में छड़ी लेकर कन्हैया के पीछे दौड़ीं।
जब प्रभु ने अपनी मैया को क्रोध में देखा तो वे मुस्कुराते हुए भागने लगे। यह कोई साधारण भागना नहीं था, यह एक दिव्य लीला की शुरुआत थी।
कुम्हार की झोंपड़ी में भगवान
भागते-भागते श्री कृष्ण एक साधारण कुम्हार की झोंपड़ी में पहुँचे। कुम्हार मिट्टी के घड़े बना रहा था।
जैसे ही उसने बाल कृष्ण को देखा, उसकी आँखें आनंद से भर गईं। वह जानता था कि ये कोई साधारण बालक नहीं, स्वयं साक्षात् परमेश्वर हैं।
कृष्ण ने मासूमियत से कहा:
“कुम्हार जी, आज मेरी मैया मुझ पर बहुत क्रोधित है। मुझे कहीं छुपा लो।”
कुम्हार ने तुरंत एक बड़े घड़े के नीचे उन्हें छिपा दिया।
कुम्हार की चतुर भक्ति
कुछ ही क्षणों में यशोदा मैया वहाँ पहुँचीं और पूछने लगीं:
“क्यों रे कुम्हार! तूने मेरे कन्हैया को देखा है?”
कुम्हार बोला:
“नहीं मैया, मैंने नहीं देखा।”
मैया चली गईं।
अब श्री कृष्ण ने अंदर से कहा:
“कुम्हार जी, अब तो मुझे बाहर निकाल दो।”
कुम्हार मुस्कुराया।
“प्रभु, पहले मुझे चौरासी लाख योनियों के बंधन से मुक्त करने का वचन दीजिए।”
भगवान मुस्कुराए।
“ठीक है, तुम्हें मुक्ति मिलेगी।”
लेकिन कुम्हार यहीं नहीं रुका।
“प्रभु, मेरे परिवार को भी मुक्ति दीजिए।”
“ठीक है।”
“मेरे बैलों को भी, जिनकी मेहनत से यह मिट्टी आई।”
भगवान ने हँसते हुए वह भी स्वीकार कर लिया।
फिर कुम्हार बोला:
“प्रभु, जो भी हमारे इस संवाद को सुने, उसे भी चौरासी के बंधन से मुक्त कर दीजिए।”
श्री कृष्ण अत्यंत प्रसन्न हुए।
“तथास्तु।”
प्रेम की शक्ति
कुम्हार ने भगवान को घड़े से बाहर निकाला, उनके चरण धोए, चरणामृत पिया और प्रेम में इतना डूब गया कि प्रभु में ही विलीन हो गया।
जरा सोचिए—जो बाल कृष्ण सात कोस लंबे-चौड़े गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठा सकते हैं, क्या वे एक घड़ा नहीं उठा सकते थे?
वे चाहते तो स्वयं बाहर आ सकते थे।
परंतु प्रभु बिना प्रेम रीझे नहीं मिलते।
इस प्रेरक कथा की सीख
• सच्चा प्रेम ही भगवान को बांध सकता है।
• भक्ति बिना स्वार्थ के होनी चाहिए।
• भगवान को यज्ञ, दान या दिखावे से नहीं, निर्मल हृदय से पाया जा सकता है।
• जो भी श्रद्धा से यह कथा सुनता है, उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन अवश्य आता है।
When Lord Krishna Said, “Hide Me Somewhere” – A Devotional Inspirational Story

“When Lord Krishna said, hide me somewhere” is a powerful devotional story that highlights the importance of pure love and selfless devotion. This spiritual tale teaches that true bhakti and compassion are greater than rituals and material offerings.
Yashoda’s Anger and Divine Pl ay
One day, young Krishna’s mischievous acts angered Mother Yashoda. Holding a stick, she ran after him.
Smiling playfully, Krishna ran and reached a potter’s hut.
The Potter’s Devotion
The potter immediately recognized the divine child. Krishna requested him to hide Him.
The potter placed Krishna under a large clay pot.
When Yashoda asked about Krishna, the potter denied seeing Him.
After she left, Krishna asked to be freed.
The potter requested liberation from the cycle of 84 lakh births.
Krishna granted it.
The potter then asked for liberation for his family, his oxen, and finally for anyone who listens to this sacred dialogue.
Krishna happily agreed.
Power of Pure Love
Krishna could lift Govardhan Hill effortlessly. He could have easily lifted the pot.
But God chooses to be bound only by love.
The potter’s selfless devotion pleased the Lord.
Moral of the Story
True devotion is based on love, not rituals.
God is attained through compassion and pure heart.
Selfless prayer brings divine grace.
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FAQ Section
जब श्री कृष्ण कुम्हार के पास क्यों छिपे?
यह भगवान की बाल लीला थी। इसके माध्यम से उन्होंने दिखाया कि सच्चे भक्त का प्रेम उन्हें बांध सकता है।
चौरासी लाख योनियों का क्या अर्थ है?
हिंदू मान्यता के अनुसार आत्मा 84 लाख जन्मों के चक्र से गुजरती है। भगवान की कृपा से इस चक्र से मुक्ति मिलती है।
इस कहानी की मुख्य सीख क्या है?
भक्ति में प्रेम और करुणा सबसे महत्वपूर्ण हैं।
क्या यह कहानी बच्चों के लिए उपयुक्त है?
हाँ, यह एक नैतिक और आध्यात्मिक कहानी है जो बच्चों और बड़ों दोनों के लिए प्रेरणादायक है।
Hindi Queries with Answers
श्री कृष्ण ने कुम्हार से क्या कहा था?
श्री कृष्ण ने कहा था कि “मेरी मैया मुझसे नाराज़ हैं, मुझे कहीं छुपा लो।”
कुम्हार ने भगवान से क्या वरदान माँगा?
कुम्हार ने अपने, अपने परिवार, बैलों और इस कथा को सुनने वालों के लिए चौरासी लाख योनियों से मुक्ति माँगी।
इस कहानी से क्या शिक्षा मिलती है?
इस कहानी से शिक्षा मिलती है कि भगवान केवल सच्चे प्रेम और निष्काम भक्ति से प्रसन्न होते हैं।
