होली का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस दिन होलिका दहन कर भक्त प्रह्लाद की रक्षा और होलिका के दहन की पौराणिक कथा का स्मरण किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार विधि-विधान से होलिका पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
होली का पर्व: बुराई पर अच्छाई की विजय
भारत में मनाया जाने वाला होली का पर्व केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह आस्था, भक्ति और सत्य की जीत का संदेश देता है। होलिका दहन की परंपरा हमें याद दिलाती है कि चाहे अत्याचार कितना भी बड़ा क्यों न हो, अंत में विजय धर्म और भक्ति की ही होती है।
यह पर्व विशेष रूप से भक्त प्रह्लाद और अत्याचारी हिरण्यकश्यप की कथा से जुड़ा हुआ है।
होलिका दहन का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्मग्रंथों, विशेषकर नारद पुराण के अनुसार, होलिका दहन पूर्णिमा तिथि में सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में किया जाना चाहिए।
भद्रा काल में होलिका दहन वर्जित माना गया है, क्योंकि भद्रा में शुभ कार्य नहीं किए जाते।
होलिका दहन के अगले दिन प्रातःकाल स्नान कर पितरों और देवताओं का तर्पण करना चाहिए। साथ ही होलिका की भस्म (विभूति) को मस्तक पर लगाने से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और रोगों से रक्षा होती है।
होलिका पूजा विधि (Holika Katha PDF Guide)
पूजा की तैयारी
घर के आंगन को गोबर से लीपकर एक चौकोर मंडल बनाएं।
उसे रंगीन अक्षत और रोली से सजाएं।
होलिका के स्थान पर कच्चा सूत लपेटें और जल, रोली, अक्षत, फूल अर्पित करें।
पूजा सामग्री
• रोली
• अक्षत
• नारियल
• गुड़
• साबुत अनाज
• कच्चा सूत
• जल का कलश
पूजा मंत्र
“ॐ होलिकायै नमः”
“ॐ प्रह्लादाय विद्महे, नारायणाय धीमहि, तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्।”
पूजा के बाद होलिका की परिक्रमा करें और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
होलिका और भक्त प्रह्लाद की कथा
प्राचीन काल में एक अत्याचारी राक्षसराज था जिसका नाम था हिरण्यकश्यप। उसने कठोर तपस्या कर ब्रह्मा से ऐसा वरदान प्राप्त किया कि उसे न कोई मनुष्य मार सके, न देवता, न दिन में, न रात में, न धरती पर, न आकाश में।
उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। हिरण्यकश्यप ने उसे कई बार मारने का प्रयास किया, पर हर बार वह बच गया।
हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को अग्नि से न जलने का वरदान था। उसने प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठने का प्रयास किया।
परंतु भगवान की कृपा से होलिका जलकर भस्म हो गई और प्रह्लाद सुरक्षित बच गया।
अंततः भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार धारण कर संध्या समय चौखट पर बैठकर हिरण्यकश्यप का वध किया।
तभी से होलिका दहन और होली का पर्व मनाया जाता है।
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होली से मिलने वाली शिक्षा
• अहंकार का अंत निश्चित है।
• सच्ची भक्ति की रक्षा स्वयं भगवान करते हैं।
• बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, सत्य की विजय होती है।
Holi Festival and Holika Dahan Story

Holi: Victory of Good Over Evil
Holi is not just a festival of colors; it symbolizes the triumph of devotion and righteousness over arrogance and evil. The tradition of Holika Dahan reminds us that faith always wins.
Religious Significance of Holika Dahan
According to Hindu scriptures, Holika Dahan should be performed after sunset during Purnima tithi. Performing it during Bhadra kaal is considered inauspicious.
The next morning, devotees should offer prayers to ancestors and apply the sacred ash of Holika for protection and prosperity.
Holika Puja Vidhi
Prepare a sacred square area in the courtyard.
Offer roli, rice, flowers, coconut, jaggery, and raw thread.
Chant mantras and perform circumambulation for family well-being.
The Story of Prahlad and Holika
The demon king Hiranyakashyap received a boon that made him nearly invincible. However, his son Prahlad remained devoted to Lord Vishnu.
Hiranyakashyap’s sister Holika, blessed with fire immunity, tried to burn Prahlad. But due to divine grace, Holika was burned while Prahlad survived.
Later, Lord Vishnu appeared as Narasimha and killed Hiranyakashyap, proving that evil can never defeat divine truth.
Moral of Holi
Faith protects the righteous.
Arrogance leads to destruction.
Truth and devotion always triumph.
FAQ – Holi Festival
होलिका दहन क्यों किया जाता है?
होलिका दहन भक्त प्रह्लाद की रक्षा और बुराई के अंत की स्मृति में किया जाता है।
होलिका पूजा का सही समय क्या है?
पूर्णिमा तिथि में सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में।
What is the significance of Holika Dahan?
It symbolizes the victory of devotion over evil.
Hindi Queries with Answers
होली क्यों मनाई जाती है?
होली भक्त प्रह्लाद की रक्षा और बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाई जाती है।
होलिका दहन की सही पूजा विधि क्या है?
पूर्णिमा की शाम प्रदोष काल में विधि-विधान से पूजा कर होलिका दहन किया जाता है।
होलिका की कथा क्या है?
होलिका ने प्रह्लाद को जलाने का प्रयास किया, पर स्वयं जल गई और प्रह्लाद बच गया।
