रात का समय था, आसमान में बादल छाए हुए थे और ठंडी हवा चल रही थी। गाँव के बाहर एक पुरानी हवेली थी, जिसे लोग ‘भूतिया भवन’ कहते थे। यह हवेली वर्षों से वीरान पड़ी थी, लेकिन इसके आसपास अजीब घटनाएं होती रहती थीं।
भूतिया हवेली का रहस्य
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रामू, एक युवा लड़का, जिसने हाल ही में गाँव में नया मकान खरीदा था, हमेशा इस हवेली के बारे में सुनता आया था। लोगों का कहना था कि हवेली में किसी आत्मा का साया है और जो भी वहाँ गया, वह लौटकर नहीं आया।
डरावनी रात की शुरुआत

एक रात रामू ने हिम्मत की और हवेली के अंदर जाने का फैसला किया। जैसे ही उसने हवेली का दरवाजा खोला, एक तेज हवा का झोंका आया और दरवाजा अपने आप बंद हो गया। हवेली के अंदर अंधेरा था और अचानक उसे किसी के चलने की आवाज़ सुनाई दी।
भूत से सामना
रामू ने जब अपनी टॉर्च जलाकर देखा, तो सामने एक सफेद साया खड़ा था। उसकी लाल चमकती आँखें और डरावना चेहरा देखकर रामू के रोंगटे खड़े हो गए। तभी वह साया बोल पड़ा – “तुम यहाँ क्यों आए हो?”
रामू घबरा गया लेकिन उसने हिम्मत से पूछा – “तुम कौन हो?” तब आत्मा ने कहा कि वह एक पुराना ज़मींदार था, जिसे वर्षों पहले धोखे से मार दिया गया था। उसकी आत्मा को मुक्ति नहीं मिली और वह अब तक इस हवेली में भटक रहा है।
क्या रामू बच पाया?
रामू ने जैसे ही यह सुना, उसने आत्मा की मदद करने की ठानी। उसने गाँव के पंडित से संपर्क किया और एक विशेष पूजा करवाई, जिससे हवेली की नकारात्मक शक्तियां खत्म हो गईं। अंततः ज़मींदार की आत्मा को शांति मिली और वह हमेशा के लिए मुक्त हो गया।
सिख
‘जमीन भवन की कहानी’ सिर्फ़ एक डरावनी कथा नहीं, बल्कि यह भी सिखाती है कि हर डर के पीछे कोई न कोई राज़ छिपा होता है। कभी-कभी, भूत भी इंसानों की मदद चाहते हैं, न कि उन्हें डराना!
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