राजा का मूर्ति प्रेम – प्रेरक कहानी (Raja Ka Murti Prem)
राजा का मूर्ति प्रेम प्रेरक कहानी (Raja Ka Murti Prem) एक गहरी नैतिक कथा है जो न्याय, परहित चिंतन और भावनाओं पर नियंत्रण का संदेश देती है। यह moral story सिखाती है कि न्याय के आसन पर बैठकर व्यक्तिगत लगाव से निर्णय लेना गलत है। Raja Ka Murti Prem story हमें बताती है कि सच्चा न्याय वही है जिसमें करुणा और दूरदृष्टि हो।
शिल्प कला के प्रति राजा का असाधारण प्रेम
एक राजा था जिसे शिल्प कला और दुर्लभ मूर्तियों से अत्यंत प्रेम था। वह दूर-दूर देशों की यात्रा करके अनोखी मूर्तियाँ लाता और उन्हें अपने राजमहल में सजाता।
महल में सैकड़ों मूर्तियाँ थीं, परंतु तीन मूर्तियाँ उसे अपनी जान से भी अधिक प्रिय थीं। वह स्वयं उनकी देखभाल करता और किसी को भी लापरवाही की अनुमति नहीं देता।
पूरा राज्य जानता था कि इन तीन मूर्तियों के प्रति राजा का लगाव असाधारण है।
एक भूल और कठोर निर्णय
एक दिन एक सेवक उन मूर्तियों की सफाई कर रहा था। दुर्भाग्यवश, उसके हाथ से एक मूर्ति गिरकर टूट गई।
जब राजा को यह समाचार मिला, तो वह क्रोध से भर उठा। उसने बिना अधिक विचार किए सेवक को तुरंत मृत्युदंड का आदेश दे दिया।
दरबार में सन्नाटा छा गया।
सेवक का अप्रत्याशित कदम
सजा सुनते ही सेवक ने तुरंत शेष दो मूर्तियों को भी तोड़ दिया।
सभी स्तब्ध रह गए।
राजा क्रोधित होकर बोला, “तुमने ऐसा क्यों किया?”
सेवक ने शांत स्वर में उत्तर दिया:
“महाराज, ये मूर्तियाँ मिट्टी की बनी हैं। आज नहीं तो कल टूट ही जातीं। यदि भविष्य में ये किसी और के हाथ से टूटतीं, तो उसे भी मृत्युदंड मिलता। मुझे तो दंड मिल ही चुका है, इसलिए मैंने अन्य दो लोगों की जान बचा ली।”
न्याय का असली अर्थ – परहित चिंतन
सेवक के शब्दों ने राजा को भीतर तक झकझोर दिया।
उसे एहसास हुआ कि उसने अपने निजी प्रेम के कारण अन्यायपूर्ण निर्णय लिया।
न्याय के सिंहासन पर बैठकर भावनाओं में बह जाना उस पद का अपमान है।
राजा ने तुरंत सेवक को दंड से मुक्त कर दिया।
जीवन का गहरा दर्शन
राजा ने सेवक से पूछा, “मृत्यु सामने देखकर भी तुम विचलित क्यों नहीं हुए? तुमने ईश्वर को दोष क्यों नहीं दिया?”
सेवक ने उत्तर दिया:
“महाराज, पहले मैं एक सेठ के यहाँ काम करता था। वह जब भी जीवन में कोई कटु अनुभव होता, ईश्वर को दोष देता था।”
एक दिन सेठ ने कड़वी ककड़ी मुझे दे दी। मैंने प्रसन्नता से खा ली।
सेठ ने पूछा, “तुमने इसे कैसे खा लिया?”
मैंने कहा, “जब आप रोज स्वादिष्ट भोजन देते हैं, तो एक दिन कड़वा भी दे दें तो शिकायत कैसी?”
“इसी प्रकार, यदि ईश्वर ने हमें सुख दिए हैं, तो कभी दुख भी दे दे तो उसे स्वीकार करना चाहिए।”
राजा की आत्मजागृति
सेवक के शब्दों ने राजा की आँखें खोल दीं।
उसे समझ आया कि सच्चा न्याय करुणा और धैर्य में है।
मूर्ति से प्रेम उचित था, परंतु किसी की जान लेना अनुचित।
राजा ने सेवक को सम्मानपूर्वक मुक्त किया और उसे अपना सलाहकार बना लिया।
इस प्रेरक कहानी की सीख
• न्याय भावनाओं से ऊपर होना चाहिए।
• परहित का चिंतन महानता की पहचान है।
• जीवन में सुख-दुख ईश्वर का प्रसाद हैं।
• निर्णय लेने से पहले दूरदृष्टि आवश्यक है।
• सच्चा साहस संयम और करुणा में है।

Raja Ka Murti Prem – An Inspirational Moral Story
Raja Ka Murti Prem is a powerful moral story about justice, compassion, and emotional control. This inspirational tale teaches that personal attachment should never influence fair judgment. True justice requires wisdom and empathy.
The King’s Deep Love for Sculptures
A king deeply loved art and rare scu lptures. He collected unique statues from distant lands and preserved them carefully in his palace.
Among all, three statues were extremely dear to him.
A Mistake and a Harsh Punishment
One day, while cleaning, a servant accidentally broke one statue.
In anger, the king immediately ordered death punishment.
The Servant’s Courageous Act
After hearing the sentence, the servant broke the remaining two statues.
When questioned, he calmly replied that he saved two future lives because those fragile statues would break someday anyway.
The Meaning of True Justice
The king realized his mistake.
A ruler must not let personal love cloud justice.
He freed the servant and learned a life-changing lesson.
Moral Lesson
Justice must be above emotions.
Compassion reflects true greatness.
Life’s bitter and sweet moments are divine blessings.
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FAQ
राजा ने सेवक को मृत्युदंड क्यों दिया?
राजा को अपनी प्रिय मूर्ति से अत्यधिक लगाव था। क्रोध में आकर उसने कठोर निर्णय ले लिया।
सेवक ने अन्य मूर्तियाँ क्यों तोड़ीं?
उसने भविष्य में अन्य निर्दोष लोगों की जान बचाने के लिए ऐसा किया।
इस कहानी की मुख्य सीख क्या है?
न्याय करते समय भावनाओं से ऊपर उठना चाहिए और परहित का विचार करना चाहिए।
क्या यह कहानी बच्चों के लिए उपयुक्त है?
हाँ, यह एक नैतिक प्रेरक कहानी है जो बच्चों और युवाओं को न्याय और संयम का महत्व सिखाती है।
Hindi Queries with Answers
राजा का मूर्ति प्रेम कहानी क्या सिखाती है?
यह कहानी सिखाती है कि न्याय करते समय भावनाओं को अलग रखकर निर्णय लेना चाहिए।
सेवक ने मूर्तियाँ क्यों तोड़ीं?
उसने भविष्य में निर्दोष लोगों की जान बचाने के लिए मूर्तियाँ तोड़ीं।
राजा को अपनी गलती का एहसास कैसे हुआ?
सेवक के तर्क और परहित चिंतन ने राजा की आँखें खोल दीं।
